शुक्रवार 30 जनवरी 2026 - 13:30
आयतुल्लाह मोहम्मद हादी अब्दख़ुदाई का निधन

हौज़ा / हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के मुमताज़ आलिम-ए-दीन और ईरान की मशहूर इल्मी व हौज़वी शख़्सियत, आयतुल्लाह मोहम्मद हादी अब्दख़ुदाई, इल्मी जद्दोजहद और दीनि ख़िदमात के बाद दार-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो गए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के मुमताज़ आलिम-ए-दीन और ईरान की नामवर इल्मी व हौज़वी शख़्सियत, आयतुल्लाह मोहम्मद हादी अब्दख़ुदाई, तवील इल्मी जद्दोजहद और दीनि ख़िदमात के बाद दार-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो गए।

आयतुल्लाह मोहम्मद हादी अब्दख़ुदाई, आयतुल्लाह ग़ुलाम हुसैन तब्रीज़ी के फ़र्ज़ंद और मशहद-ए-मुक़द्दस के नामी उलमा में शुमार होते थे। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इस्लामी मआरिफ़ की तर्वीज, दीनि उलूम की तदरीस और तुल्लाब-ए-उलूम-ए-दीनिया की तरबियत के लिए वक़्फ़ कर रखी थी और बिलआख़िर दावत-ए-हक़ पर लब्बैक कहते हुए इस दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम आयतुल्लाह अब्दख़ुदाई, हौज़ा-ए-इल्मिया ख़ुरासान में आला हौज़वी दुरूस के असातिज़ा में शुमार होते थे। तदरीस, तहक़ीक़ और इल्मी सरगर्मियों के तवील अरसे के दौरान उन्होंने इल्मी, सक़ाफ़ती और अख़लाक़ी मौज़ूआत पर गिरां-क़द्र आसार और तालीफ़ात यादगार छोड़ीं, जो अहल-ए-इल्म के लिए सरमाया-ए-इफ्तिख़ार की हैसियत रखती हैं।

इल्मी और तदरीसी ख़िदमात के साथ-साथ, आयतुल्लाह अब्दख़ुदाई ने मुख़्तलिफ़ अहम ज़िम्मेदारियाँ भी अंजाम दीं। इनमें मदरसा-ए-इल्मिया जाफ़रिया मशहद के मुतवल्ली रहना, वैटिकन में इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान के सफ़ीर के तौर पर ख़िदमत अंजाम देना और मजलिस-ए-ख़ुबरेगान-ए-रहबरी की रुकनियत शामिल है। ये ज़िम्मेदारियाँ उनके इल्मी मक़ाम, दीनि बसीरत और निज़ाम-ए-इस्लामी के एतमाद की वाज़ेह अक्कासी करती हैं।

मरहूम का निधन से हौज़ा-ए-इल्मिया ख़ुरासान और इल्मी व दीनि हल्क़ों में गहरे रंज व ग़म की लहर दौड़ गई है, जबकि उलेमा, फ़ुज़ला और शागिर्दों ने उनकी वफ़ात को इल्मी दुनिया के लिए एक बड़ा नुक़सान क़रार दिया है।

आयतुल्लाह मोहम्मद हादी अब्दख़ुदाई की तशीअ-ए-जनाज़ा और मजालिस-ए-ताज़ियत के वक़्त और मक़ाम का ऐलान बाद में मुताल्लिक़ा इदारों की जानिब से किया जाएगा।

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